UPI पेमेंट फीस को लेकर चल रही चर्चा के बीच, फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने एक अहम बयान दिया है। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल कस्टमर्स पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर आखिरी फैसला नहीं हुआ है। पूरी खबर जानें।
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने 6 अगस्त को साफ किया कि अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होता है, तो इसका असर सिर्फ मर्चेंट्स पर पड़ेगा। रेगुलर UPI यूजर्स पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि MDR से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सिक्योरिटी में ज्यादा इन्वेस्ट करने में मदद मिलेगी। आखिर में, सभी UPI यूजर्स को फायदा होगा।
MDR पर कोई आखिरी फैसला नहीं
निर्मला सीतारमण ने कहा कि UPI पर MDR लागू होगा या नहीं, इस पर अभी कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है। यह फैसला UPI सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी और NPCI करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह प्रोसेस तभी जारी रहेगा जब पार्लियामेंट टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पास कर देगी। इस बिल में पेमेंट सिस्टम्स एंड सेटलमेंट एक्ट, 2007 के सेक्शन 10A में बदलाव का प्रस्ताव है।
कांग्रेस का क्या कहना है?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि नया बिल UPI ट्रांज़ैक्शन के फ्री होने की कानूनी गारंटी हटा देगा। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में सभी UPI ट्रांज़ैक्शन पर MDR लगाने का रास्ता बन सकता है, जिससे आखिर में कस्टमर्स पर बोझ पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि आम लोगों को भविष्य में UPI इस्तेमाल करने के लिए फीस देनी पड़ सकती है।
फाइनेंस मिनिस्टर ने इस दावे को झूठा बताया
निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के दावे को गुमराह करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर पार्लियामेंट में कंस्ट्रक्टिव तरीके से चर्चा होनी चाहिए, न कि गलत जानकारी फैलाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समय UPI यूज़र्स पर कोई फीस लगाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है।
RBI गवर्नर ने क्या कहा
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के हालिया बयान के बाद UPI पर MDR को लेकर बहस तेज हो गई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम चलाने में खर्च आता है, और किसी को तो इसका बोझ उठाना ही होगा। हालांकि, उन्होंने यह साफ तौर पर नहीं बताया कि यह खर्च कौन उठाएगा।
